Wednesday, 27 August 2014


    रिस्तो की ठंड

रिस्तो की ठंड ने

भावनाओ की नदी को

बर्फ़ की चट्टान बना दिया

अजीब सा सर्द अहसास

मोत सा सन्नाटा

न बह  पाने की मजबुरी

आव्द्धता,एकेलापन

बसंत के आगमन की अंतहीन प्रतीक्षा

मजबुरी,असहायता,दयनीयता,क्रोध

सर्द मौसम बहुत लम्बा,बहुत लम्बा खींच रहा है

चट्टान के नीचे जो बर्फ़ीला पानी है

कही बो भी न जम जाय |

 

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