Wednesday, 27 August 2014


            बचपन

सर्द मौसम;

और रजाईयो मै छिपा गर्म अहसास

सुलगती बोरशी

और अंगारो मै छिपी शकरकंद की भीनी खूश्बू

ललचाई नज़रे टपकती लार

वो वचपन के सपने ;वो बचपन का प्यार |

 

मोटी ऊनी चादर मै लिपटी

ठिठुरती दादी की जादुभरी आवाज़

गहरी आंखो के आईने मै है सवार

वचपन की मासुमियत ;बचपन का खुमार |

 

वो फ़ेलती आंखे, रा‍क्षसी हंसी की गुंज

राजकुमार का साहस, सुखद अंत

शकरकंद का वंटना,दुसरे के हिस्से को

ललचाई निगाहो से तकना

वो बचपन की मस्ती ;वो बचपन का आलम |

 

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