बचपन
सर्द
मौसम;
और
रजाईयो मै छिपा गर्म अहसास
सुलगती
बोरशी
और
अंगारो मै छिपी शकरकंद की भीनी खूश्बू
ललचाई
नज़रे टपकती लार
वो
वचपन के सपने ;वो बचपन का प्यार |
मोटी
ऊनी चादर मै लिपटी
ठिठुरती
दादी की जादुभरी आवाज़
गहरी
आंखो के आईने मै है सवार
वचपन
की मासुमियत ;बचपन का खुमार |
वो
फ़ेलती आंखे, राक्षसी हंसी की गुंज
राजकुमार
का साहस, सुखद अंत
शकरकंद
का वंटना,दुसरे के हिस्से को
ललचाई
निगाहो से तकना
वो
बचपन की मस्ती ;वो बचपन का आलम |
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